जीवन भ्रम,संशय,संदेह और विपदाओं के बीच ही गुजरता है ...हम हमारे ही बनाये संबंधों के शिकार हो जाते है अपनी मुक्त स्वतंत्रता को संघर्ष करने के लिए छोड़ देते है ... रिश्तों के एक सिमित सांचे का निर्माण कर उसी में ढलने के लिए छोड़ देते है कई पीढ़ियों को, और विवश करते है उन परम्पराओं के निर्वहन हेतु जिनके अर्थ और अस्तित्व का स्वयं बोध नहीं...
यह ब्लॉग केवल जीवन को सही अर्थो में समझने के लिये बना है..